भरोसा करना कोई बुरी आदत नहीं है न की कोई गलत बात लेकिन हम अपने जीवन मे किसी न किसी को भरोसा जरूर करते है और करना भी चाहिए l
एक कहावत भी हैं भरोसा पे दुनिया टिकी है ये कथन भी सही है लेकिन हमे और आप को यह तय करना होता है की किस पर भरोसा किया जा सकता है सही मैने मे जो आप पर पूर्ण रूप से भरोसा करे वही भरोसे के लायक होता है l लेकिन कई बार ऐसा होता है की हम अपने चाह को भी अपना भरोसा ,विश्वास मन कर भूल कर बैठते है ,हम जो चाहते है अक्सर हम उन पर अपनी चाह पूरा करने की ख्वाइश करते है लेकिन वो ख्वाइश अगर पूरी न हो तो हम उस पर ग़ुस्सा हो जाते है लेकिन अगर हम अपनी कोई भी अभिलाषा किसी पर रखते है तो पूरी होने के संभावना कम ही होती है इसीलिए मेरा मानना है की भरोसा ,विश्वास ,उम्मीद अगर अपने अंदर हो तो भरोसा टूटने का कोई सावल ही नहीं उठता है
और चाहे जैसे भी परिसतिथी हो अगर आप किसी और पर भरोसा करते है और कहते है उसने मेरा भरोसा तोड़ दिया, क्यूंकी कोई आपके विचारों के अनुरूप चले यह बहुत कम ही होता है इसका मतलब यह नहीं की हम लोगों पर भरोसा करना छोड़ दे भरोसा भी लोगों पर करना चाहिए किन्तु उद्देश्य ,परिसतिथी , को देखते हुये l

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